"मूसा! अपने जूते उतार, क्योंकि तू पवित्र भूमि पर खड़ा है। मैं तेरे पिताओं का परमेश्वर हूँ। मैंने अपने लोगों का दुख देखा है। अब तू जा, फिरौन से कह कि मेरे लोगों को जाने दे।"
मूसा ने आकाश की ओर हाथ बढ़ाया। परमेश्वर ने एक प्रचंड पुरवाई हवा भेजी। रात भर हवा चली, और समुद्र का पानी दो हिस्सों में बँट गया। बीच में सूखा रास्ता बन गया। इब्रानी लोग दौड़ते हुए उस पार चले गए। जैसे ही आखिरी व्यक्ति किनारे पर पहुँचा, मूसा ने फिर हाथ बढ़ाया—समुद्र की लहरें लौटीं और पूरी मिस्री सेना को अपने में समा लिया। the ten commandments movie in hindi
फिरौन रामसेस ने मूसा को पहचाना और ताना मारा: "तू जो राजकुमार था, आज गड़रिया बनकर आया है? मैं तेरे किसी परमेश्वर को नहीं मानता।" "मूसा
रामसेस ने अपने ही बेटे को खोया। रातों-रात उसने आदेश दिया: "जाओ! यहाँ से चले जाओ!" यहाँ से चले जाओ
इब्रानी लोग मिस्र से निकल पड़े। वे लाल सागर के किनारे पहुँचे, तभी पीछे से धूल उड़ती दिखी—रामसेस ने अपना फैसला बदल लिया था और अपनी पूरी सेना लेकर आ रहा था। इब्रानी घबरा गए: "मूसा, क्या मरने के लिए ही तू हमें ले आया?"
तब शुरू हुआ विनाश का दौर। मूसा ने अपनी लाठी उठाई—नील नदी का पानी लहू बन गया। मेंढक, जूँ, अंधकार, बालों वाली मक्खियाँ, पशुओं की मृत्यु और फोड़े—एक के बाद एक नौ विपत्तियाँ आईं। पर हर बार रामसेस का दिल पत्थर जैसा कठोर हो जाता। जब दसवीं विपत्ति आई—"प्रथमजात की मृत्यु"—तो उस रात मिस्र के हर घर में, फिरौन के महल से लेकर जेल तक, पहले बेटे की मौत हो गई। इब्रानियों ने अपने दरवाज़ों पर मेम्ने के लहू से चिह्न बना रखा था, इसलिए वे बच गए।